युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु। युक्तस्वप्नाव बोधस्य योगो भवति दु:ख ।।

यानी युक्त आहार और विहार से शरीर के सभी प्रकार के रोग दूर हो सकते हैं फिर चाहे वे मानसिक हों या शारीरिक।

“गीता”

युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु। युक्तस्वप्नाव बोधस्य योगो भवति दु:ख ।।

यानी युक्त आहार और विहार से शरीर के सभी प्रकार के रोग दूर हो सकते हैं फिर चाहे वे मानसिक हों या शारीरिक।

“गीता”

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